Thursday, January 15, 2026

अपहरण कांड का अभियुक्त 16 साल से फरार, मुख्य अभियुक्त सरकारी सेवक पर मेहरबानी क्यों?


अपहरण कांड का मुख्य अभियुक्त 16 साल से फरार, सरकारी सेवक पर मेहरबानी क्यों?


NBW और कुर्की के बावजूद नहीं हुई गिरफ्तारी, PHED के कर्मचारी पर गंभीर आरोप


पटना।

कोतवाली थाना, पटना में दर्ज कांड संख्या 201/2009 एक बार फिर सुर्खियों में है। इस अपहरण कांड का अभियुक्त सूचिव्रत उर्फ चुल्लू उर्फ उपेन्द्र बीते 16 वर्षों से फरार है। मामले में माननीय न्यायालय द्वारा गैर-जमानती वारंट (NBW) और कुर्की–जप्ती का आदेश जारी हो चुका है, इसके बावजूद अब तक अभियुक्त की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।


सूत्रों के अनुसार, सूचिव्रत पर कार्बन मोबाइल कंपनी में कार्यरत रहने के दौरान बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और ठगी के भी आरोप हैं। इन मामलों के उजागर होने के बाद उसके फरार होने की बात सामने आई है।


दिल्ली-NCR में छिपा होने की आशंका


जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का दावा है कि फरार अभियुक्त दिल्ली-NCR, विशेष रूप से गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन या उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर क्षेत्र में छिपा हो सकता है। हालांकि इतने वर्षों बाद भी गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।


सरकारी सेवक मुख्य आरोपी, फिर भी कार्रवाई शून्य


इस मामले में सूचिव्रत के साथ दो अन्य अभियुक्त भी नामजद थे।

एक अभियुक्त अवधेश राय का कोरोना काल में निधन हो चुका है। दूसरा एवं मुख्य अभियुक्त रवि कुमार उर्फ लालन यादव, जो वर्तमान में बिहार सरकार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) में सरकारी सेवक के रूप में पदस्थापित है, इस कांड में लगभग एक माह जेल में रह चुका है और फिलहाल जमानत पर बाहर है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अपहरण जैसे जघन्य अपराध में जेल जाने के बावजूद विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस विभागीय कार्रवाई नहीं की गई।


चार्ज फ्रेम टालने का आरोप, 12 जनवरी को अहम सुनवाई


सूत्रों के अनुसार, मामले में चार्ज फ्रेम की प्रक्रिया बार-बार टलती रही। हर पेशी पर मुख्य अभियुक्त रवि कुमार उर्फ लालन यादव किसी न किसी बहाने से अदालत से समय लिया जाता रहा। अब 12 जनवरी 2026 को न्यायालय ने चार्ज फ्रेम के लिए अगली तारीख निर्धारित की है, जिसे मामले का अहम मोड़ माना जा रहा है।


जेल के दौरान छुट्टी और दूसरी शादी पर भी सवाल


यह भी आरोप है कि जेल में रहने की अवधि के दौरान रवि कुमार उर्फ लालन यादव ने विभाग से किस आधार पर छुट्टी ली, और क्या उस दौरान तथ्यों को छुपाया गया, यह अब तक स्पष्ट नहीं है।


इसके साथ ही यह मामला भी सामने आया है कि पहले से विवाहित होने के बावजूद सरकारी सेवा में रहते हुए उन्होंने दूसरी शादी की, जो कि सरकारी सेवा नियमावली का उल्लंघन माना जाता है। इस पर विभागीय जांच हुई या नहीं, यह भी सवालों के घेरे में है।


क्या कानून सबके लिए समान?


एक ओर मुख्य अभियुक्त वर्षों से फरार है, वहीं दूसरी ओर उसी कांड का एक अभियुक्त सरकारी सेवा में सुरक्षित बना हुआ है। यह स्थिति कानून की समानता और प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।


अब सबकी निगाहें 12 जनवरी 2026 की सुनवाई और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की भूमिका पर टिकी हैं।


Super Admin

Santosh Singh

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